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भोई भारत की एक प्राचीन जाति है। यह एक आखेटक जाति है जिसका उल्लेख महाभारत और रामायणजैसे भारत के प्राचीनतम महाकाव्यों में मिलता है। भोई समाज हिन्दू धर्म के अंग है। वर्णाश्रम व्यवस्था में वे शूद्र माने जाते रहे हैं। ये आदिकाल से जल जंगल और ज़मीन पर आश्रित होकर अपना जीवन यापन प्राकृतिक संसाधनों की सहायता से करते चले आ रहे हैं।महाभारत के भिष्म पितामह की दुसरी माता सत्यवती एक धीवर(निषाद)पुत्री थी और रामायण मे प्रभु श्रीरामचंद्र और केवट के संवाद का वर्णन है इस बात से यह साबीत होता हे की भोई एक आदिम जाती है

यह जनजाति मेघालय के पहाड़ी क्षेत्रों में पायी जाती है भोई' भारत की एक प्राचीन क्षत्रिय जाती है, जिसका उल्लेेख महाभारत और रामायण जैसे भारत के प्राचीनतम महाकाव्यों में मिलता है। भोई जनजाति अनेक जातियों में विभाजित है। इसकी कई शाखाएँ है राजगोंड भोई, राज भोई, झिंगा भोई तथा परदेशी भोई ऐसी अनेक जातियाँ इस वर्ग में है। इनके साम्राज्य का वर्णन 'ओरिसा' में स्थित प्रदेशों था। जिसका वर्णन ओरिसा के इतिहास में पाया जाता है। यह क्षत्रिय वंश के है। ये लोग चंद्र की पूजा करते है।

हमारा उद्देश्य है भोई समुदाय के विकास और उत्थान के लिए समर्पित कार्य करना, उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, और रोजगार के अवसर प्रदान करके उनकी गुणवत्ता में सुधार करना।

हमारा सपना है एक सशक्त और आत्मनिर्भर भोई समुदाय का निर्माण करना, जहाँ हर व्यक्ति अपने जीवन में सुधार ला सके और समाज में समान अवसर प्राप्त कर सके।

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Mrs. Komal Bawane

CEO

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Mr. Kishor Bawane

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हमारे संगठन में सदस्य बनकर, आप भोई समुदाय के उत्थान और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हम शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार के क्षेत्र में अवसरों का विस्तार करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं, जिससे समुदाय आत्मनिर्भर बन सके। आपके सहयोग से हम अधिक से अधिक परिवारों की मदद कर सकते हैं और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। सदस्य बनने पर आपको हमारी योजनाओं और कार्यक्रमों का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा, जिससे आप सीधा समाज पर प्रभाव डाल सकते हैं। आइए, हमारे साथ जुड़ें और एक सशक्त भोई समुदाय के निर्माण में योगदान दें!